रात के करीब बारह बजे होंगे। गांव में शादी का माहौल था। रोशनी, शोर, हंसी—सब कुछ वैसे ही था जैसा किसी भी भोज में होता है। लेकिन उसी भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी थे, जो खाने नहीं… इंतज़ार करने आए थे।
सारण जिले के रिविलगंज थाना क्षेत्र के नयका बड़का बैजू टोला की यह घटना है। जहां तीन युवक—दीपक सिंह, जितेश सिंह और अक्षय कुमार—शादी का निमंत्रण पाकर भोज खाने पहुंचे थे। उन्हें क्या पता था कि यह रात उनके लिए ज़िंदगी और मौत के बीच की एक पतली रेखा बन जाएगी।
बताया जा रहा है कि पहले से घात लगाए कुछ लोगों ने अचानक इन तीनों पर हमला कर दिया। चाकू निकले… और फिर बिना किसी चेतावनी के ताबड़तोड़ वार शुरू हो गए। शरीर के कई हिस्सों पर गहरे घाव… और कुछ ही सेकंड में तीनों युवक खून से लथपथ जमीन पर गिर पड़े।

गांव के लोग दौड़े। कोई पानी लाया, कोई कपड़ा। लेकिन सबसे पहले जरूरत थी अस्पताल की। आनन-फानन में तीनों को रिविलगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए उन्हें छपरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
घायल दीपक और जितेश का कहना है—“हमारी हत्या की कोशिश की गई। कुछ हमलावर पेशेवर अपराधी भी थे।”
इस हमले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें गांव के ही कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं—कुंदन सिंह, पप्पू सिंह, सूरज कुमार, विनय सिंह, सरोज सिंह, आयुष कुमार, धीरज सिंह, विकास कुमार, बबलू कुमार, गोलू उर्फ कृष्णा सिंह, नीरज कुमार और अमरेंद्र सिंह।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पप्पू सिंह, कुंदन सिंह और विकास सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी की तलाश जारी है।
लेकिन सवाल वही है, जो हर बार ऐसे मामलों के बाद उठता है—
क्या अब गांव की शादियां भी सुरक्षित नहीं रहीं?
क्या भोज में जाना अब जोखिम बन गया है?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या यह हमला सिर्फ एक झगड़ा था, या इसके पीछे कुछ और कहानी छुपी है?
फिलहाल, तीन युवक अस्पताल में हैं…
और गांव में, शादी की रोशनी अब डर की परछाइयों में बदल चुकी है।

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