“नाम आपका… सिलेंडर किसी और का!” — नगरा में गैस खेल का खुलासा, एजेंसी पर FIR
सारण के नगरा में “रसोई गैस” अब सिर्फ चूल्हा नहीं जला रही थी… बल्कि कुछ लोगों की जेब भी गरमा रही थी। मामला खुला तो ऐसा कि सिस्टम पर “डिलीवर्ड” और घर पर “नॉट रिसीव्ड”!
● क्या है पूरा खेल?
मेसर्स महावीर इण्डेन ग्रामीण वितरक पर आरोप है कि उपभोक्ताओं के नाम और आईडी पर बिना बताए सिलेंडर बुक हो रहे थे। कागजों में डिलीवरी भी पूरी… लेकिन असल में लोगों के घर तक गैस पहुँची ही नहीं। यानी आपका नाम, आपका सब्सिडी… और फायदा किसी और का!
● शिकायत से खुली पोल

एक नहीं, कई उपभोक्ताओं ने आवाज उठाई—“हमने बुक ही नहीं किया, फिर डिलीवरी कैसे हो गई?”
जांच हुई तो सामने आया फर्जी बुकिंग का पूरा जाल, जहां सिस्टम में सब “नॉर्मल” दिखाया जा रहा था, लेकिन जमीन पर गड़बड़झाला फुल ऑन।
● कानून ने कसा शिकंजा
मामला सीधा-सीधा सब्सिडाइज्ड LPG की कालाबाजारी का निकला।
अब एजेंसी के प्रोपराइटर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 07 के तहत FIR दर्ज—यानी खेल अब कानूनी दायरे में।
● DM का सख्त संदेश
सारण के डीएम वैभव श्रीवास्तव ने साफ कहा—
“जनता के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। FIR तो बस शुरुआत है… लाइसेंस कैंसिल तक कार्रवाई जाएगी।”
● बड़ी बात क्या है?

ये सिर्फ एक एजेंसी की कहानी नहीं… ये उस सिस्टम की पोल है, जहां डिजिटल रिकॉर्ड पर भरोसा है, लेकिन ग्राउंड पर निगरानी कमजोर पड़ जाए तो ‘डाटा सही, डिलीवरी गायब’ जैसे खेल शुरू हो जाते हैं।
👉 अब सवाल ये है:
आपके नाम पर भी कहीं “फर्जी डिलीवरी” तो नहीं हो रही?
क्योंकि इस कहानी में… अगला नाम आपका भी हो सकता है।

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