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“सारण में सड़कें सुरक्षित क्यों नहीं? एकमा हादसे के बाद उठे बड़े सवाल”

कल कौन घर लौटेगा और कौन नहीं…
सारण की सड़कों पर अब यह सवाल हर परिवार के साथ चल रहा है।
एकमा–मांझी मार्ग पर हंसराजपुर नहर के पास, पेट्रोल पंप के समीप एक तेज रफ्तार ट्रक ने स्कूटी सवार विनोद कुमार सिंह को कुचल दिया।
विनोद कुमार सिंह… उम्र करीब 50 साल… हेकाम गांव के रहने वाले… दुकान बंद कर स्कूटी से घर लौट रहे थे।
लेकिन घर नहीं पहुंचे।
लोग उन्हें अस्पताल ले गए।
एकमा से छपरा रेफर किया गया।
मगर रास्ते में ही जिंदगी हार गई।
इसके बाद सड़क पर गुस्सा उतर आया।

ग्रामीणों ने शव रखकर स्टेट हाईवे 96 जाम कर दिया।
करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा।
क्योंकि अब लोगों को सिर्फ मौत की खबर नहीं दिखती…
उन्हें अपनी बारी दिखाई देने लगी है।
सवाल सिर्फ एक ट्रक चालक का नहीं है।
सवाल उस व्यवस्था का है जहां हर दिन सड़क पर कोई न कोई कुचला जा रहा है।
कहीं तेज रफ्तार…
कहीं ओवरलोडिंग…
कहीं बिना निगरानी के दौड़ते ट्रक…
और कहीं प्रशासन की वही पुरानी औपचारिकता।
सारण में शायद ही कोई ऐसा दिन बचा हो जब सड़क हादसे की खबर न आती हो।

लेकिन हर हादसे के बाद वही दो लाइनें सुनाई देती हैं—
“जांच होगी…”
“कार्रवाई होगी…”
मगर सड़कें फिर खून मांगने लगती हैं।
सरकार को सिर्फ हेलमेट अभियान चलाने से आगे बढ़ना होगा।
विशेष निगरानी टीम…
ब्लैक स्पॉट की पहचान…
रात में ट्रकों की मॉनिटरिंग…
और हाईवे पर सख्त पेट्रोलिंग की जरूरत है।
वरना…
आज विनोद कुमार सिंह थे।
कल कोई और होगा।
और फिर किसी गांव में एक और घर इंतजार करता रह जाएगा।

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