“वफ़ा की उम्मीद थी… लेकिन कहानी इश्क़ तक पहुंच गई।
रिश्ता पति का था… लेकिन दिल किसी और के नाम हो गया…”
ज़रा सोचिए…
चार छोटे-छोटे मासूम बच्चे…
उनके सामने उनकी मां दुल्हन बनी बैठी है…
पास में पिता भी खड़ा है… गांव वाले भी मौजूद हैं…
लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि मां की मांग में सिंदूर उसका पति नहीं… बल्कि प्रेमी भर रहा है।

अब आप सोच रहे होंगे कि बवाल हुआ होगा?
मारपीट हुई होगी?
लेकिन नहीं…
सब कुछ गांव के सामने… पंचायत के बीच… और सबसे हैरानी की बात—पति की रजामंदी से हुआ।
ये कहानी है बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा थाना क्षेत्र के बहुआरा पट्टी गांव की…
जहां चार बच्चों की मां, 32 साल की महिला की शादी उसके प्रेमी से करा दी गई।

बताया जा रहा है कि महिला अपने पति के साथ पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रहती थी।
वहीं पति के एक दोस्त से उसकी नजदीकियां बढ़ीं…
दोस्ती प्यार में बदली… और ये रिश्ता एक-दो साल नहीं… बल्कि करीब 14 साल तक चलता रहा।
धीरे-धीरे बात छुपी नहीं…
प्रेमी गांव पहुंच गया…
तनाव बढ़ा… मामला थाना तक पहुंचा… पंचायत बैठी…
अब यहां कोई फिल्मी लड़ाई नहीं हुई…
पति ने गुस्से की जगह ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया।
पति ने कहा—
“जब दिल साथ नहीं रहना चाहता… तो रिश्ते को बोझ बनाकर रखने से क्या फायदा?”
फिर गांव वालों और पंचायत की मौजूदगी में ग्राम कचहरी के पास मंदिर में महिला की शादी उसके प्रेमी से करा दी गई।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे भावुक और शायद सबसे दर्दनाक दृश्य वो था…
जब चारों बच्चे अपनी मां की शादी अपनी आंखों के सामने देखते रहे।
अब सवाल कई हैं…
क्या ये प्रेम की जीत है?
पति का त्याग?
रिश्तों की हार?
या बदलते समाज की नई तस्वीर?
क्योंकि यहां एक मां को उसका प्यार मिल गया…
एक पति ने रिश्ता छोड़ दिया…
लेकिन उन चार मासूम बच्चों के मन में क्या चल रहा होगा…
शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं।
“कलयुग की ये कहानी… लोगों को हैरान भी कर रही है… और रिश्तों पर सोचने को मजबूर भी।”
Sanjeev mishra desk
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