“छपरा की महापौर का बड़ा आरोप है। उनका कहना है कि कुछ पार्षद जनसेवा के लिए चुने गए थे, लेकिन अब वे संवेदक और ठेकेदार की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या जनता ने उन्हें अपने वार्ड की समस्याएं उठाने के लिए चुना था या फिर सरकारी टेंडरों में हिस्सेदारी करने के लिए? अगर जनप्रतिनिधि ही ठेकेदार बन जाएं, तो फिर जनता की निगरानी कौन करेगा?”


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