कभी-कभी मौत इतनी खामोशी से आती है कि पूरा परिवार सिर्फ देखते रह जाता है।
सारण जिले के तरैया थाना क्षेत्र के भलुआ शंकर डीह गांव में 35 वर्षीय इलेक्ट्रिकल इंजीनियर रमेश कुमार पंडित की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वह छुट्टी में अपने घर आए हुए थे। परिवार के मुताबिक, घर में एक बिजली का स्विच ऑन-ऑफ करने के दौरान उन्हें जोरदार करंट लगा। देखते ही देखते वह जमीन पर गिर पड़े।
यह वही रमेश कुमार पंडित थे, जिन्होंने शायद अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बिजली के उपकरणों और तकनीक को समझने में बिताया होगा। लेकिन विडंबना देखिए, जिस बिजली को समझना उनका पेशा था, उसी बिजली ने उनकी जिंदगी छीन ली।

परिजन बताते हैं कि करंट लगते ही घर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। अपने पीछे वह भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
मृतक के बड़े भाई मुसाफिर पंडित का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और आगे की प्रक्रिया के लिए छपरा ले जाने की बात कही। उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर बेहतर इलाज मिलता, तो शायद नतीजा कुछ और हो सकता था।
अब सवाल सिर्फ एक परिवार के दर्द का नहीं है। सवाल यह भी है कि आखिर एक साधारण स्विच ऑन-ऑफ करते समय ऐसा क्या हुआ कि एक प्रशिक्षित इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की जान चली गई? क्या यह शॉर्ट सर्किट था, बिजली व्यवस्था की लापरवाही थी या कोई तकनीकी खामी?
फिलहाल रमेश कुमार पंडित की मौत ने परिवार से उनका सहारा छीन लिया है, जबकि गांव में हर कोई यही कह रहा है—किसने सोचा था कि घर का एक स्विच किसी की जिंदगी का आखिरी स्विच साबित होगा।

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