कभी सरकार ने कहा था—डिजिटल बनिए, कैशलेस बनिए, UPI अपनाइए।
व्यापारियों ने भरोसा किया। दुकानों पर QR कोड लगे, ग्राहक मोबाइल से भुगतान करने लगे और देखते-देखते UPI भारत की पहचान बन गया।
लेकिन अब 15 अक्टूबर से UPI के कुछ व्यापारी लेन-देन पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने की चर्चा और फैसले के बाद व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लगाने की व्यवस्था की गई है, जबकि सरकार और NPCI का कहना है कि इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता।
इसी मुद्दे पर eBihar DigitalNews से बातचीत में छपरा व्यवसाय संघ के अध्यक्ष एवं श्री प्रकाश ऑर्नामेंट्स के संचालक वरुण प्रकाश राजा ने अपनी चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा कि जब सरकार ने UPI को बढ़ावा दिया था, तब व्यापारियों को भरोसा दिलाया गया था कि डिजिटल भुगतान पर किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। अब यदि MDR लागू होता है, तो व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

वरुण प्रकाश राजा का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारी पहले से ही बढ़ती लागत, टैक्स अनुपालन और कम होते मार्जिन के बीच कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त खर्च जुड़ने से व्यापारियों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यदि व्यापारियों की चिंताओं को नहीं सुना गया, तो इसका असर बाजार और डिजिटल भुगतान दोनों पर पड़ सकता है।
हालांकि NPCI का दावा है कि अधिकांश छोटे व्यापारी इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे और बड़ी संख्या में UPI लेन-देन पहले की तरह बिना MDR के जारी रहेंगे।
अब सवाल यह है कि डिजिटल इंडिया की इस कहानी में व्यापारी और सरकार के बीच संतुलन कैसे बनेगा? यही चर्चा आज देशभर के बाजारों से लेकर छपरा की सर्राफा दुकानों तक सुनाई दे रही है।
पूरी बातचीत सुनिए, समझिए MDR क्या है, और फिर अपनी राय कमेंट में जरूर दीजिए।

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