
यह सिर्फ एक खबर नहीं है… यह उस खामोशी की आवाज़ है, जो एक घर में अचानक उतर आई है।
सारण ज़िले के शीतलपुर रेलवे स्टेशन के पास एक शव मिलता है। सुबह की खबर… लेकिन यह सिर्फ “एक शव” नहीं था। यह 25 साल के राहुल कुमार थे। एक ट्रक चालक… अपने घर का सहारा… अपने परिवार की उम्मीद।
राहुल… जो रोज़ सड़क पर रहता था, आज सड़क पर नहीं था। गांव में शादी थी… अपने ही लोगों के बीच था। लेकिन उसी रात, वो घर नहीं लौटा।
घर वालों ने सोचा — शायद कहीं रुक गया होगा… शायद देर हो गई होगी…
लेकिन “शायद” कब “सच” बन जाता है, कोई नहीं जानता।
सुबह खबर आती है — शीतलपुर स्टेशन के पास एक शव पड़ा है।
पहचान होती है… और एक घर में सब कुछ बदल जाता है।
रेलवे पुलिस आती है… कार्रवाई शुरू होती है… पोस्टमार्टम के लिए शव छपरा सदर अस्पताल भेजा जाता है… कागज़ी प्रक्रिया पूरी होती है…
लेकिन एक सवाल… कागज़ों में कहीं दर्ज नहीं होता।
राहुल के बड़े भाई कहते हैं —
“वो ट्रक चलाकर पूरे घर को संभालता था… अब ये जिम्मेदारी कौन उठाएगा?”
और फिर एक और बात सामने आती है —
धारदार हथियार से हमला…
यानी यह सिर्फ एक मौत नहीं… एक हत्या की आशंका।
लेकिन सच क्या है… यह पुलिस की जांच बताएगी।
पर तब तक…
एक मां का बेटा चला गया…
एक भाई का सहारा चला गया…
एक परिवार की कमाई चली गई…
और समाज?
वो फिर वही सवाल पूछ रहा है —
आख़िर क्यों?
हत्या… फिर हत्या… और फिर हत्या…
क्या हम सिर्फ खबरें पढ़ने के लिए रह गए हैं?
या कभी ऐसा दिन भी आएगा… जब ऐसी खबरें लिखनी ही न पड़ें?
यह कहानी राहुल की है…
लेकिन सवाल… हम सबके लिए है।

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