पश्चिम बंगाल के कुमारगंज से एक तस्वीर सामने आई है…
जहां लोकतंत्र की बुनियाद पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेंदु सरकार…
जिन्हें जनता के बीच होना था,
उन्हें भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा।
तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि
उन्होंने खुलेआम हमला किया…
और ये सब कैमरे में कैद हो गया।
सोचिए…
वोट देना या ना देना… ये आपका अधिकार है।
लेकिन क्या किसी उम्मीदवार को इस तरह पीटना भी लोकतंत्र का हिस्सा है?
ये सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है…
ये लोकतंत्र की उस भावना पर चोट है,
जहां विचारों की लड़ाई होनी चाहिए…
ना कि लाठी और भीड़ के दम पर फैसला।
वीडियो वायरल है…
लेकिन सवाल उससे भी ज्यादा बड़ा है…
👉 क्या हम सच में लोकतंत्र को समझ पाए हैं?
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