सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है…
ये उस सिस्टम की कहानी है, जहाँ सड़कें तो हैं… मगर सुरक्षा नहीं है।
बिहार के छपरा से एक खबर आई है…
और ये खबर, हमेशा की तरह… थोड़ी देर तक सुनी जाएगी… फिर भुला दी जाएगी।

दिघवारा थाना क्षेत्र… झाबुआ बसंत गांव…
रात के करीब 11 बजे…
कुछ लोग शादी से लौट रहे थे…
शायद थके हुए… लेकिन खुश होंगे…
लेकिन… एक अज्ञात वाहन आया…
और उस खुशी को… हमेशा के लिए कुचल कर चला गया।
दो लोगों की मौके पर ही मौत…
और एक ने रास्ते में दम तोड़ दिया…
15 साल का सुखल मांझी…
60 साल की लालमति देवी…
और 75 साल के शंकर राम…
तीन नाम…
जो अब सिर्फ आंकड़ा बन जाएंगे…
आप देखिए…
ये ‘अज्ञात वाहन’ शब्द… कितना आसान है बोलना…
लेकिन इसका मतलब क्या है?
मतलब… न कोई जिम्मेदार…
न कोई जवाबदेही…
और हर बार की तरह…
पुलिस जांच में जुटी है…
लेकिन सवाल वही है—
क्या जांच से जान वापस आ जाएगी?
या फिर… अगली खबर का इंतजार कीजिए…
क्योंकि इस देश में… सड़क हादसे अब खबर नहीं…
एक सिलसिला बन चुके हैं…”

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