कहानी सारण की है… और कहानी सिर्फ एक लड़के की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो मिट्टी से उठकर आसमान छूने का दम रखता है।
नाम है अभितेश कुमार सिंह।
घर – नरांव, पोस्ट – नरांव, थाना – अवतार नगर, जिला – सारण।
पिता – पूर्व सैनिक शैलेंद्र कुमार सिंह।
माता – रेखा देवी।
दो भाइयों में छोटे अभितेश… लेकिन सपने बड़े।
गांव की सादगी, सीमित संसाधन… लेकिन इरादे लोहे जैसे। पढ़ाई की शुरुआत छपरा के सेंट्रल स्कूल से, फिर जयप्रकाश यूनिवर्सिटी से मैथ्स में ऑनर्स। कोई कोचिंग का बड़ा सहारा नहीं, कोई चमक-दमक नहीं… बस किताबें, मेहनत और भरोसा।

पहला बड़ा मुकाम—IBPS के जरिए बैंक PO।
यहां रुक सकते थे… लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
इसके बाद SSC CGL में लगातार सफलता—
पहले बने इनकम टैक्स इंस्पेक्टर,
फिर मेहनत की रफ्तार और तेज हुई… और अब बन चुके हैं CGST इंस्पेक्टर।
आज उनकी पोस्टिंग हल्दिया, पश्चिम बंगाल में है।
और घर में? गर्व… खुशी… और वो संतोष जो हर मां-बाप के चेहरे पर दिखता है।
अभितेश खुद कहते हैं—
“मेरी हर सफलता में मेरे पिता, मां और भाई-बहनों का साथ और आशीर्वाद सबसे बड़ा सहारा रहा है।”
बड़े भाई अभिषेक पहले से फौज में हैं… यानी सेवा और समर्पण इस परिवार की रगों में है।
लेकिन कहानी अभी जारी है…
क्योंकि अब अगला लक्ष्य है—UPSC।
सिर्फ 29 साल की उम्र…
गांव में रहकर पढ़ाई…
कोई बैक सपोर्ट नहीं…
और फिर भी एक के बाद एक सफलता।
ये कहानी बताती है—
कि अगर इरादा साफ हो, तो रास्ते खुद बनते जाते हैं।
सारण का ये लाल… अभी और कमाल करने वाला है।


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