“सारण में एक नया टावर युग”
सारण के बनियापुर के दाढ़ी बाड़ी गांव में एक 40 वर्षीय महिला बिजली के टावर पर चढ़ गई है। तस्वीरें देखिए। नीचे भीड़ है, पुलिस है, समझाने वाले लोग हैं और ऊपर एक महिला है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि वह टावर पर क्यों चढ़ी? सवाल यह है कि आखिर समाज किस दिशा में जा रहा है?
पहले प्रेमी-प्रेमिका घर से भागते थे, फिर धरना देते थे, अब सीधे टावर पर चढ़ जा रहे हैं। कभी मोबाइल टावर, कभी हाईटेंशन बिजली का टावर। ऐसा लगता है जैसे अपनी बात मनवाने का सबसे तेज़ रास्ता अब जमीन पर नहीं, आसमान में खोजा जा रहा है।

जिस टावर पर यह महिला चढ़ी है, वहां से गुजरने वाली बिजली किसी की जान लेने के लिए काफी है। लेकिन शायद डर से बड़ा हो गया है गुस्सा, हताशा या फिर चर्चा में आने की चाहत। यह प्रेम है, विरोध है, मानसिक दबाव है या सोशल मीडिया के दौर में वायरल होने की बेचैनी? जवाब आसान नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि ऐसी घटनाएं अब अपवाद नहीं रहीं। एक घटना होती तो उसे संयोग कहते, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं संकेत देती हैं कि समाज के भीतर कहीं न कहीं संवाद की जगह कम होती जा रही है। लोग अपनी बात सुनाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं।

नीचे खड़ी भीड़ मोबाइल से वीडियो बना रही है। ऊपर खड़ा इंसान अपनी जिंदगी दांव पर लगाए हुए है। और इनके बीच खड़ा है हमारा समाज, जो शायद यह समझने की कोशिश ही नहीं कर रहा कि आखिर लोग टावर पर चढ़ने को मजबूर क्यों हो रहे हैं।

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