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“मौत भी नहीं कर पाई जुदा: दिल्ली अग्निकांड में एक-दूसरे की बाहों में मिली अफ्रीकी दंपति की लाश”

दिल्ली की आग में जल गया एक सपना, लेकिन आख़िरी सांस तक नहीं टूटा साथ

दिल्ली के मालवीय नगर में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। लेकिन इस हादसे के मलबे से एक ऐसी कहानी निकली, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया।

कहते हैं मौत रिश्तों को भी खत्म कर देती है। लेकिन इस आग में एक अफ्रीकी दंपति ने इस कहावत को गलत साबित कर दिया।

जब रेस्क्यू टीम होटल के बाथरूम का दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची, तो सामने का दृश्य किसी फिल्म का नहीं, बल्कि एक दर्दनाक हकीकत का था। महिला टॉयलेट सीट पर बैठी थी, उसका सिर पति के कंधे पर टिका था। पति कुर्सी पर बैठा था और दोनों एक-दूसरे को बाहों में समेटे हुए थे। ऐसा लग रहा था जैसे मौत दरवाजे पर खड़ी हो, लेकिन दोनों ने आखिरी पल तक एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा।

यह कोई पर्यटक जोड़ा नहीं था। वे हजारों किलोमीटर दूर अफ्रीका से दिल्ली आए थे, एक सपना लेकर। सपना था अपने परिवार को बढ़ाने का। दोनों IVF ट्रीटमेंट करवा रहे थे और उम्मीद थी कि जल्द ही उनकी जिंदगी में एक नई किलकारी गूंजेगी।

लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

आग लगी, धुआं फैला और जान बचाने के लिए दोनों बाथरूम में छिप गए। शायद उन्हें लगा होगा कि मदद आ जाएगी। शायद उन्होंने एक-दूसरे से कहा होगा, “सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन धुएं ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।

सबसे पहले मौके पर पहुंचे मेडिकल स्टाफ के वसीम राजा कहते हैं, “मैंने जिंदगी में बहुत कुछ देखा है, लेकिन ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा। दोनों आखिरी पल तक एक-दूसरे के साथ थे।”

इस हादसे ने सिर्फ 21 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि एक पूरे परिवार के जन्म लेने से पहले ही उसकी कहानी खत्म कर दी।

होटल में सुरक्षा नियमों की अनदेखी, बंद निकासी रास्ते और अवैध निर्माण अब जांच का विषय हैं। मालिक गिरफ्तार हो चुका है, मैनेजर फरार है। जांच होगी, रिपोर्ट आएगी, जिम्मेदार तय होंगे।

लेकिन उस जोड़े के लिए अब कोई फैसला मायने नहीं रखता।

क्योंकि दिल्ली की उस आग में सिर्फ दो लोग नहीं मरे, एक सपना, एक उम्मीद और एक बनने वाला परिवार भी हमेशा के लिए राख हो गया। 💔

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