सारण के बनियापुर थाना क्षेत्र का यह वीडियो है। जगह बताई जा रही है पांडेयपुर मोड़। वीडियो में कुछ युवक एक 19 वर्षीय लड़के को घेरकर पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। दावा है कि पीड़ित युवक चौड़ाऊवा गांव का निवासी अंकित कुमार है।
ज़रा इस दृश्य को देखिए। सड़क पर कानून नहीं दिखता, भीड़ दिखती है। न्याय नहीं दिखता, गुस्सा दिखता है। और सबसे खतरनाक बात यह है कि मारने वाले भी निडर हैं और देखने वाले भी बेबस।
वीडियो में 5-6 युवक एक लड़के की पिटाई करते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग बीच-बचाव की कोशिश करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत आती क्यों है? क्या किसी को सजा देने का अधिकार अब सड़क पर खड़ी भीड़ ने अपने हाथ में ले लिया है?

बताया जा रहा है कि अंकित कुमार को जान से मारने की नीयत से पीटा गया। आरोप है कि घटना के बाद भी अब तक कोई ठोस पुलिस कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
लेकिन इस वीडियो से उठने वाला बड़ा सवाल पुलिस से भी बड़ा है। समाज किस दिशा में जा रहा है? जब किसी विवाद का फैसला अदालत, कानून और प्रशासन की जगह लात-घूंसों से होने लगे, तब लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बजती है।

आज पीटा जा रहा युवक कोई और है, कल कोई भी हो सकता है। भीड़ का कोई संविधान नहीं होता, कोई नियम नहीं होता। भीड़ सिर्फ ताकत पहचानती है और ताकत का नशा अक्सर इंसानियत को कुचल देता है।
उम्मीद है कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी, दोषियों की पहचान करेगी और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। क्योंकि अगर कानून कमजोर पड़ा, तो भीड़ और मजबूत होती जाएगी।

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