छुक… छुक… छुक…
छपरा जंक्शन से जैसे ही ट्रेन संख्या 02527 आनंद विहार टर्मिनल के लिए रवाना हुई, प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों के चेहरों पर खुशी दिखाई देने लगी। यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं थी, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए राहत की खबर थी जो रोजगार, शिक्षा और अपने परिवार से मिलने के लिए दिल्ली की यात्रा करते हैं।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस नई साप्ताहिक सुपरफास्ट ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। ट्रेन छपरा से बलिया, मऊ और वाराणसी होते हुए लगभग 17 घंटे में आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी। दिल्ली जाने वालों के लिए यह समय और सुविधा दोनों के लिहाज से एक बड़ी सौगात मानी जा रही है।

मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सारण सांसद राजीव प्रताप रूड़ी, महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, एमएलसी सच्चिदानंद राय, विधायक छोटी कुमारी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
सांसद राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि यह ट्रेन सिर्फ दिल्ली जाने वालों के लिए नहीं, बल्कि दिल्ली से अपने घर लौटने वाले लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगी। त्योहारों, छुट्टियों और पारिवारिक अवसरों पर इसका लाभ हजारों यात्रियों को मिलेगा।
ट्रेन में क्या है खास?

उद्घाटन के दिन जारी कोच संरचना के अनुसार ट्रेन में कुल 17 कोच लगाए गए हैं। इनमें 5 थर्ड एसी (B1 से B5), 2 सेकेंड एसी (A1 और A2), 5 स्लीपर कोच (S1 से S5), 4 जनरल कोच तथा एक लगेज-कम-गार्ड कोच शामिल है। यानी सामान्य यात्रियों से लेकर एसी श्रेणी में सफर करने वालों तक, सभी वर्गों को ध्यान में रखा गया है।
लेकिन इस खुशी के बीच एक सवाल बार-बार सुनाई दे रहा था…
पटना के लिए क्या?
छपरा का सबसे बड़ा यात्री प्रवाह दिल्ली नहीं, पटना की ओर है। इलाज के लिए पटना, पढ़ाई के लिए पटना, नौकरी के लिए पटना और सरकारी कामकाज के लिए भी पटना। हर दिन हजारों लोग बसों, निजी वाहनों और ट्रेनों के सहारे राजधानी का सफर करते हैं।

यही कारण है कि मंच से सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने रेल मंत्री के सामने छपरा-पटना ट्रेन चलाने की मांग प्रमुखता से रखी। लोगों को उम्मीद थी कि पहली बार रेल मंत्री छपरा आए हैं तो इस दिशा में कोई बड़ी घोषणा होगी।
स्टेशन चमक रहा था। करोड़ों रुपये की लागत से कार्यक्रम आयोजित हुआ था। नई ट्रेन की सौगात भी मिली। लेकिन जिन लोगों की नजरें पटना की ओर थीं, वे अभी भी किसी घोषणा का इंतजार करते रह गए।
हालांकि उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। मंच से यह स्पष्ट हुआ कि छपरा-पटना रेल सेवा की मांग रेल मंत्री तक पहुंच चुकी है। अब देखना होगा कि यह मांग सिर्फ भाषणों तक सीमित रहती है या जल्द ही पटरियों पर दौड़ती हुई दिखाई देती है।
मढ़ौरा की ओर बढ़ा काफिला
कार्यक्रम के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मढ़ौरा स्थित रेल इंजन निर्माण कारखाने के लिए रवाना हुए। यह वही आधुनिक फैक्ट्री है जहां बने शक्तिशाली रेल इंजन अब विदेशों तक निर्यात किए जा रहे हैं। आज एक और इंजन के निर्यात की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के रेल निर्माण क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
कभी सारण की पहचान सिर्फ रेल यात्रियों से होती थी, आज वही सारण दुनिया को रेल इंजन भेज रहा है।
फिलहाल छपरा को दिल्ली की नई ट्रेन मिल गई है। इसके लिए खुशी भी है और संतोष भी। लेकिन प्लेटफॉर्म पर खड़े हजारों यात्रियों की निगाहें अब भी एक दूसरी ट्रेन को तलाश रही हैं।
क्योंकि दिल्ली की राह आसान हुई है…
लेकिन पटना का इंतजार अभी बाकी है।

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