“भूख का कोई धर्म नहीं होता, रोटी से बड़ा कोई दान नहीं होता।”
कहते हैं कि किसी भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य है। क्योंकि जब पेट खाली होता है, तब इंसान की सबसे बड़ी जरूरत सिर्फ एक वक्त की रोटी होती है।
ये तस्वीरें और वीडियो छपरा की हैं। सामने दिखाई दे रहे हैं लायंस युवा क्लब और लायंस क्लब के सदस्य। हर शनिवार ये लोग एक ऐसा काम करते हैं, जिसकी चर्चा मंचों से कम और लोगों की दुआओं में ज्यादा होती है। गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। ऐसे लोग, जिनके लिए दो वक्त की रोटी भी कई बार संघर्ष बन जाती है।
शनिवार का दिन आते ही कई जरूरतमंदों को इस भंडारे का इंतजार रहता है। क्योंकि उन्हें मालूम है कि आज पेट भरकर सम्मान के साथ भोजन मिलेगा। किसी के चेहरे पर मुस्कान आए, कोई भूखा न सोए, शायद इसी सोच के साथ यह अभियान लगातार चल रहा है।

आज के दौर में जब लोग अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त हैं, तब समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए समय निकालना और नियमित रूप से भोजन की व्यवस्था करना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है। यह सिर्फ भंडारा नहीं, बल्कि इंसानियत की वह मिसाल है जो बताती है कि समाज की असली ताकत संवेदनशील लोगों से बनती है।
छपरा में लायंस युवा क्लब और लायंस क्लब द्वारा हर शनिवार चलाया जाने वाला यह सेवा अभियान उन लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण है, जिनकी जिंदगी में अक्सर सुविधाओं से ज्यादा संघर्ष दिखाई देता है।
रोटी परोसने वाले हाथ शायद इतिहास की किताबों में दर्ज न हों, लेकिन जरूरतमंदों की दुआओं में उनकी पहचान हमेशा बनी रहती है।


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