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छपरा में आयुक्त न्यायालय का बहिष्कार! वकीलों का फूटा गुस्सा | Commissioner Court Boycott

छपरा से एक खबर है… खबर अदालत की है, व्यवस्था की है और उस सवाल की भी है जो शायद फाइलों के नीचे दब गया है।
आजादी के बाद से एक परंपरा चली आ रही है। जब भी सिविल कोर्ट यानी व्यवहार न्यायालय के समय में बदलाव होता है, उससे जुड़े दूसरे न्यायालय—चाहे आयुक्त न्यायालय हो, समाहर्ता न्यायालय हो या अन्य प्रशासनिक न्यायालय—भी अपने समय में परिवर्तन करते रहे हैं। ताकि अधिवक्ताओं, पक्षकारों और न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की असुविधा न हो।
लेकिन इस बार छपरा में मामला थोड़ा अलग है।
व्यवहार न्यायालय, छपरा का समय भीषण गर्मी को देखते हुए सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक कर दिया गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिले के लगभग सभी न्यायालयों ने अपने समय में बदलाव कर लिया, लेकिन आयुक्त न्यायालय का समय नहीं बदला गया।

बार एसोसिएशन का दावा है कि इस संबंध में जिला विधि मंडल, छपरा के महामंत्री शशि भूषण त्रिपाठी द्वारा आयुक्त महोदय को तीन अलग-अलग पत्र भेजे गए। पत्रों में गर्मी, अधिवक्ताओं की परेशानी और न्यायिक कार्य प्रभावित होने की बात कही गई, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
इसी मुद्दे को लेकर आज बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक हुई। बैठक में ध्वनि मत से आयुक्त न्यायालय के बहिष्कार का फैसला लिया गया। अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक व्यवस्था के प्रति “नज़रअंदाज़ी” बताया और नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब तक समय में बदलाव नहीं किया जाता, वे आयुक्त न्यायालय में कार्य नहीं करेंगे।
अधिवक्ता मानस पीयूष, जो अध्यक्ष निगरानी समिति, विधि मंडल व्यवहार न्यायालय छपरा. ने कहा—
“हम लोगों को सुबह 6:30 बजे न्यायालय पहुंचना पड़ता है। व्यवहार न्यायालय का काम दोपहर 1 बजे तक खत्म हो जाता है, लेकिन आयुक्त न्यायालय 3 बजे तक चलने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।”
बैठक में छपरा विधि मंडल के अध्यक्ष रवि रंजन प्रसाद सिंह, महामंत्री शशि भूषण त्रिपाठी, वर्तमान संयुक्त सचिव अधिवक्ता मानस पीयूष (सह अध्यक्ष, निगरानी समिति), अधिवक्ता सियाराम सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

सवाल बस इतना है…
क्या अदालतों का समय एक व्यवस्था के तहत तय होगा, या फिर हर अदालत अपने-अपने समय से चलेगी? और अगर अधिवक्ता ही परेशान हैं, तो न्याय पाने आया आम आदमी किस हाल में होगा? यही सवाल आज छपरा की अदालतों के गलियारों में गूंज रहा है।

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