बंदूक, बवाल और बिहार का जमीन विवाद
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि सारण के डोरीगंज में जमीन विवाद हुआ।
सवाल यह है कि आखिर बिहार में जमीन का झगड़ा होते ही हाथ में लाठी से पहले बंदूक कैसे पहुंच जाती है?
सवाल यह भी है कि अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद फैसला सड़क पर और फायरिंग के जरिए क्यों होने लगता है?

और सबसे बड़ा सवाल, क्या कानून का डर खत्म हो चुका है?
सारण जिले के डोरीगंज थाना क्षेत्र के बलवन टोला गांव में जमीन पर मिट्टी भराई को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद मारपीट, पत्थरबाजी और फिर गोलीबारी में बदल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं एक पक्ष के लोगों को खुलेआम हथियार लहराते और फायरिंग करते हुए भी देखा जा सकता है।
इस हिंसक झड़प में भैरोपुर गांव निवासी 24 वर्षीय अभिषेक कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि वह अपने मित्र के घर पूजा का प्रसाद देने आया था, लेकिन विवाद की चपेट में आ गया। उसे बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच रेफर किया गया है। वहीं दोनों पक्षों के पांच अन्य लोग भी घायल हुए हैं।

जानकारी के अनुसार जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, उस पर पहले से न्यायालय में मामला चल रहा है। इसके बावजूद मिट्टी भराई का काम शुरू हुआ और विरोध के बाद विवाद हिंसक हो गया।
अब सवाल यह है कि जब मामला कोर्ट में है तो कानून के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया गया?
वीडियो में जिस तरह से हथियार लहराते हुए फायरिंग की जा रही है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर इन लोगों के पास हथियार कहां से आए? क्या प्रशासन को पहले से विवाद की जानकारी नहीं थी? और क्या ग्रामीण इलाकों में कानून से ज्यादा ताकत बंदूक की मानी जाने लगी है?
पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की बात भी कही जा रही है।
लेकिन बिहार के लोग एक और सवाल पूछ रहे हैं—क्या हर जमीन विवाद का अंत अब गोली और अस्पताल में ही होगा?

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