“अरे… अस्पताल के बाहर ये दुल्हन जैसी सजी गाड़ी किसकी है?”
छपरा सदर अस्पताल में लोग यही पूछ रहे थे।
इमरजेंसी गेट पर अचानक एक चमचमाती गाड़ी आकर रुकती है… फूलों से सजी हुई… बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह।
लोग ठहर गए…
किसी ने सोचा कोई बड़ा आदमी आया है, किसी ने कहा शायद शादी-ब्याह का मामला होगा।

लेकिन… जब सच्चाई सामने आई, तो कई लोगों के चेहरे पर मुस्कान थी… और आंखों में एक अलग चमक।
क्योंकि इस बार कोई दूल्हा-दुल्हन नहीं…
एक नन्ही सी “राजलक्ष्मी” घर जा रही थी।
छपरा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बसाढ़ी गांव की बेबी देवी ने एक बच्ची को जन्म दिया।
और परिवार ने फैसला किया—
बेटी आई है… तो स्वागत भी खास होगा!
गाड़ी सजाई गई… जैसे घर में खुशियां नहीं, खुद लक्ष्मी आई हो।
मां और नवजात बच्ची को उसी सजी हुई गाड़ी से सम्मान के साथ घर ले जाया गया।
बच्ची के पिता तनय की बात सुनिए… दिल छू जाएगी—
“बेटियां बेटों से कम नहीं होतीं… प्यार, पढ़ाई और मौका मिले, तो हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। बेटी बोझ नहीं, परिवार की शान होती है।”
जरा सोचिए…

जहां आज भी कई जगह बेटी होने पर लोग मायूस हो जाते हैं…
वहीं छपरा का ये परिवार कह रहा है—
“हमारे घर राजकुमारी राजलक्ष्मी आई है!”
और सच कहें…
समाज बदलने के लिए बड़े भाषण नहीं…
ऐसी छोटी-छोटी खुशियां ही काफी होती हैं।

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