“मजबूरी, गरीबी, लाचारी, बेरोज़गारी…” ये सिर्फ़ शब्द नहीं हैं। ये उस आदमी की ज़िंदगी हैं, जो हर सुबह इस उम्मीद…
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“मजबूरी, गरीबी, लाचारी, बेरोज़गारी…” ये सिर्फ़ शब्द नहीं हैं। ये उस आदमी की ज़िंदगी हैं, जो हर सुबह इस उम्मीद…
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“मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है…” राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की ये पंक्तियाँ आज छपरा की…
Read More“भूख का कोई धर्म नहीं होता, रोटी से बड़ा कोई दान नहीं होता।” कहते हैं कि किसी भूखे को भोजन…
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छपरा में शनिवार को भाकपा (माले) के बैनर तले राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन बिहार में कथित…
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फूलों से सजी ट्रेन आपने पहले भी देखी होगी, लेकिन क्या कभी किसी ट्रेन पर फूलों की बारिश होते देखी…
Read Moreआज का दृश्य छपरा जंक्शन का है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था अमरनाथ यात्रा पर…
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छपरा शहर की एक सड़क… राहत रोड। जहां लोग रोज़मर्रा का सामान खरीदने जाते हैं। लेकिन इस बार एक दुकान…
Read Moreछपरा आखिर इतना खामोश क्यों है? कल एक दोहरे हत्याकांड के चश्मदीद गवाह को अपराधियों ने गोली मार दी। सवाल…
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घर में चीखें हैं। सिसकियां हैं। रोती हुई मां है, बिलखती हुई पत्नी है। और इन सबके बीच एक मासूम…
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दृश्य सुंदर था। लेकिन गंगा की कहानी सिर्फ सुंदर दृश्यों से पूरी नहीं होती। सवाल यह है कि कल-कल करती…
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