एकमा का भोदसा गांव… एक प्राचीन महावीर मंदिर… और मंदिर में खंडित मिली हनुमान जी की प्रतिमा।
सवाल सिर्फ एक प्रतिमा का नहीं है, सवाल उस भरोसे का भी है जो गांव-कस्बों में मंदिरों, मस्जिदों और धार्मिक स्थलों से जुड़ा होता है। गांव के लोग कह रहे हैं— यह मंदिर करीब सौ साल पुराना है। यहां रोज पूजा होती है, लोग माथा टेकते हैं, आस्था लेकर आते हैं। लेकिन बुधवार की रात कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे इलाके को बेचैन कर दिया।
कौन हैं वो लोग जिन्होंने यह किया? क्यों किया? क्या यह सिर्फ शरारत है या फिर माहौल बिगाड़ने की कोशिश? ये सवाल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि जब भी धार्मिक प्रतीकों पर हमला होता है, सबसे पहले समाज की शांति पर चोट लगती है।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन पहुंचा— एसडीएम, एसडीपीओ, बीडीओ, सीओ और पुलिस बल। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होगी, जांच होगी और नई प्रतिमा स्थापित की जाएगी। लेकिन असली परीक्षा जांच की है। क्या पुलिस दोषियों तक पहुंचेगी? क्या सच्चाई सामने आएगी?

मंदिर के पुजारी हरेन्द उपाध्याय उर्फ पूरी बाबा ने थाने में आवेदन देकर आशंका जताई है कि किसी असामाजिक तत्व ने धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से यह घटना की है।
एकमा के भोदसा गांव की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, एक जिम्मेदारी भी है— प्रशासन के लिए, समाज के लिए और हम सबके लिए। क्योंकि आस्था पर हमला, किसी एक समुदाय या गांव का मुद्दा नहीं होता… वह पूरे समाज की शांति की परीक्षा बन जाता है।

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