पटना का मुसल्लहपुर हाट कभी छात्रों के सपनों का केंद्र माना जाता था, लेकिन अब यह इलाका कोचिंग संस्थानों के वर्चस्व की लड़ाई को लेकर चर्चा में है। खान सर की कोचिंग के बाहर हुई फायरिंग, तोड़फोड़ और हिंसा की घटना ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चिंताजनक है।

मुसल्लहपुर हाट में शिक्षा के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये का कारोबार होता है। हर गली में कोचिंग, हर मकान में क्लास और हर संस्थान ज्यादा से ज्यादा छात्रों को अपनी ओर खींचने की होड़ में लगा है। ऐसे माहौल में प्रतिस्पर्धा अब केवल रिजल्ट और पढ़ाई तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि वर्चस्व की यह लड़ाई धीरे-धीरे तनाव, टकराव और हिंसा का रूप लेती नजर आ रही है।
सबसे दुखद बात यह है कि इस संघर्ष के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित वही छात्र हो रहे हैं, जो अपने भविष्य के सपनों के साथ पटना आते हैं। जिस इलाके में किताबों और करियर की चर्चा होनी चाहिए, वहां फायरिंग, तोड़फोड़ और शक्ति प्रदर्शन की खबरें सुर्खियां बन रही हैं।

अगर समय रहते प्रशासन ने सख्त और निष्पक्ष कदम नहीं उठाए, तो कोचिंग के वर्चस्व की यह लड़ाई शिक्षा के केंद्र को एक खतरनाक संघर्ष क्षेत्र में बदल सकती है। सवाल सिर्फ एक कोचिंग या एक शिक्षक का नहीं है, सवाल उन लाखों छात्रों के भविष्य का है जो मुसल्लहपुर हाट को अपनी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता मानते हैं।

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